सतरंगी ख्वाबों का गुलिस्ताँ होकभी ना ख़त्म होने वाला ऐसा सुन्दर हमारा जहाँ हो...
कल कल बहती नदी का उन्माद हो
ऊँचे वृक्षों और लताओं सी फूलती चाहत हो
कभी ना ख़त्म होने वाली ऐसी हमारी कहानी हो...
अग्नि की तपन और धुँआ मैं उठती वो खलिश का अहसास हो
आसमां की चादर और मखमली गास की सेज हो

झूमती झीले और बल खाते फव्वारे होरौशनी की झिलमिल हो और बस नजारो के मेले हो
कभी ना ख़त्म होने वाले ऐसे सारे मंजर हो....

हवा के झोंको मैं बर्फ सी ठंडक हो
चट्टानों सा विश्वास और पर्वतो सा अंदाज़ हो
भटकती राहो मैं फिर कुछ पाने की तलाश हो
कभी ना ख़त्म होने वाली ऐसी हमारी आस हो...

धरा मैं ही हैं एक दिन मिटना और यह हो की कुछ नहीं हमारा हो
हैं सब कुछ नश्वर , फिर भी
ख्वाबों का गुलिस्ताँ हो और
कभी ना ख़त्म होने वाला ऐसा अमर हमारा साथ हो...
(नश्वर: Mortal)
P.S. : Photographs Shot at Yellowstone National Park, US

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